समसामयिक परिवेश में जो कुछ घटता है वो कभी लावे की तरह तो कभी बर्फ की तरह पिघल कर मेरी क़लम से अक्षरों में बदलता जाता है | अक्षरों की ये आँच, ये ठँडक उन सब तक पहुँचे जो अपनी बात *अपनी भाषा में कहने में झिझकते नहीं हैं !!!!
जाड़ों का मौसम
मनभावन सुबह
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शुक्रवार, 26 मई 2017
२७ मई : माँ की यादें !!
२७ मई : माँ का परिनिर्वाण दिवस ! आज भी(७बजकर ४० मिनट) उस दिन कीअविश्वसनीय यादें स्मृतियों में ताज़ा हैं !!
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