जाड़ों का मौसम

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मनभावन सुबह

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शनिवार, 28 अक्तूबर 2017

सोच की तहरीर

हर जगह का मौसम अपनी सरग़ोशियों में कुछ कह जाता है.... हमनें जो सुना शब्दों में अपने आप ढल गया!!🍁🍁

शनिवार, 29 जुलाई 2017

तुलसी जयंती: भारतीय संस्कृति के पुरोधा तुलसीदासजी !!

 भारतीय संस्कृति के अमर पुरोधा तुलसीदास जी की लेखनी ने रामभक्ति की मंदाकिनी की पावन धारा से इस धरा पर आध्यात्मिक , नैतिक व मानवीय मूल्यों की  ऐसी सृष्टि की है कि देश-काल की सीमा को लांघकर , केवल शिक्षित वर्ग में ही नहीं अक्षरज्ञान से वंचित जन-जन के मानस में भी इसकी छाप अमिट रही है और भविष्य में भी सर्वदा रहेगी । 
कवि त्रिकालदर्शी होता है तभी तो अपने समय में सज्जन और दुर्जन / संत असंत की जो व्याख्या गोस्वामी तुलसीदास जी नें अपने समय में की थी वही  परिभाषा वर्तमान में भी चरितार्थ हो रही है।  तुलसी दासजीअपने लोकविश्रुत, विश्वविख्यात ग्रंथ "रामचरित मानस " के 
' सुंदरकांड ' के वर्षाऋतु वर्णन में  कहते हैं :--
हरित भूमि तृण संकुल  ,  समुझि परहि नहिं पंथ।
जिमि पाखंड विवाद तें ,  लुप्त होहिं सदग्रंथ     ।।
अर्थात  वर्षाऋतु में घासफूस की अधिकता के कारण रास्ता दिखाई नहीं देता ठीक वैसे ही जैसे पाखंड-विवाद (असत्य व वितंडावाद ) के कारण सदग्रंथ के सत्य को समझना असंभव होता है। 
अपने एक ओर दृष्टांत द्वारा वे स्पष्ट करते हैं ;--------
उपजहि एक संग जग माहीं ,जलज जोंक जिमि गन बिलगाहीं। 
सुरा सुधा सम साधु असाधू  ,जनक एक जग जलधि अगाधू।।
संत और असंत दोनों ही संसार में एक साथ जन्म लेते हैं पर कमल और जोंक ही की भांति दोनों की प्रवृति भिन्न -भिन्न होती है। एक ही जल से उत्पन्न होने पर भी कमल का दर्शन सभी के लिए सुखकारी होता है और जोंक दूसरों का रक्त चूसने की आदत के कारण दुखदाई लगती है। इस संसार-सागर से उत्पन्न, एक ही परमपिता की संतान होने पर  संत और असंत के स्वभाव और प्रभाव में सुधा और सुरा के समान अंतर होता है। 
महान भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म के विषय में सर्वमान्य धारणा है ; " पंद्रह सौ चौवन विषै ,कालिंदी के तीर। 
                  सावन सुक्ला सप्तमी ,तुलसी धरेउ शरीर।। "
श्रावण -शुक्ला -सप्तमी को जन्मे गोस्वामी जी की सकारात्मक चिंतन शीलता ,विचारात्मकता सर्वत्र मंगल का विधान करे !!
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मंगलवार, 18 जुलाई 2017

कौन सी बात ,कौन सी घटना किस सोच को जन्म दे देती है ये समझना बहुत मुश्किल है- - - -  पर क्या कीजिए मानव का मन है ही ऐसा ! कब कौन सी यात्रा पर निकल पड़े इसका कोई भरोसा नहीं ! हम कल औरोरा बोरियालिस के रंग में ऐसे रंगे कि सोच के कितने बंद कपाट खुले, ये तो याद नहीं पर हमेशा की तरह हमनें अपने को प्राचीन संस्कृतियों की उस दहलीज़ पर खड़े पाया जहाँ सभी मानव सभ्यताएँ  प्रकृति-पूजक थी । समस्त विश्व की प्राचीनत्तम सभ्यताओं में मनुष्य को  दिव्य प्रकाश की ओर ले जाने वाली देवियों का वर्णन मिलता है। वैदिक सभ्यता की देवी उषस या ऊषा, यूनानी सभ्यता की देवी ईओष (Eos ) और रोमन सभ्यता  की देवी औरोरा ही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं।इन तीनों में एक बड़ी समानता यह है कि इन तीनों के परिधान केसरिया रंग के हैं । 
ऋग्वेद के २० सूक्तों में ऊषा देवी की स्तुति की गई है। ७५ वें सूक्त में कहा गया है ," द्यौ: (आकाश )की पुत्री ऊषा नें अपना प्रकाश फैलाया। उसने सबसे अप्रिय शत्रु रूपी अन्धकार को दूर भगाया और प्राणियों के व्यवहार के लिए उनके गंतव्य मार्गों को दिखाया। " ऋग्वेद की देवी उषा /ऊषा, कमनीय सर्वाधिक सुंदर है। वो तमोमयी रजनी की बहन है। चिर-प्रौढ़ा होने पर भी चिर-युवा हैं। ऊषा सुभगा (सौभाग्यवती ),रेवती (वैभव संपन्न ), प्रचेता: (बुद्धिमती ),मघोनी (दानशीला ) और  
अमृतस्य केतु: (अमरत्व का चिन्ह) है। ऊषा सूक्त में उनको गायों की माता कहा गया है।इनका रथ घोड़े या लाल गायों द्वारा खींचे जाने का वर्णन मिलता है।  
यूनानी भोर की देवी ईओष , टाइटन ह्यपेरिओन  (hyperion ) की पुत्री है, जो अद्वितीय सुंदरी और दैवीय ज्योति से संबद्ध हैं। उनको पँखों वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है जो घोड़ों वाले रथ पर आती हैं। वो अपनी कोमल गुलाबी उंगलियों से स्वर्ग के द्वार खोलकर मार्ग प्रकाशित करती हैं ताकि उनका भाई हेलिओस (सूर्य देव ) अपने रथ पर आकाश मार्ग की परिक्रमा कर सके। सेलेने (चाँद ) उसकी बहन है।' केसर ' उनका प्रतीक है। वे आशा ,ऊर्जा ,सौभाग्य व सौंदर्य प्रदायिनी देवी हैं। 
  रोमन औरोरा देवी के भी एक भाई सॉल (सूर्य ) और बहन लूना (चाँद ) है।औरोरा वास्तव में यूनानी भोर की देवी का ही प्रत्यवर्तन है। 
विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताओं में भोर की वेला में सुख,सौभाग्य,वैभव ,आशावादिता ,ऊर्जा व नवजीवन का संचार करने वाली शक्ति देवियों या मातृशक्ति को ही माना  गया है। सुमेरियन - अया या अजा , फिनीशियन  - अस्तारते , अरब की हेक़ेत , जर्मेनिक - ऑस्टरा (ईस्टर इनको ही समर्पित प्राचीन पर्व माना जाता है )  आदि सभी मातृदेवियाँ ही हैं।
  - - - - और औरोरा बोरियालिस की रंगबिरंगी चुनरी का प्रकाश अपनी अद्वितीय आभा में हमें ना जाने कितने हीअनगिनत संदेश सुना रहा है।शायद " हरियाली-तीज "और "सुमेरु-ज्योति" के बीच के एक सुदृढ़ संबंध को हम इस हरे रंग के विस्तार में महसूस कर रहे हैं। हरियाली तीज की धानी चूनर, धानी चूड़ियाँ  और सुमेरु ज्योति का हरा रंग , धरती की हरी चूनर को ओढ़कर, लहरा कर मुस्कराता आकाश  - - - - दोनों ही प्रकृति की उर्वरता ,उसकी सृजनशीलता को सम्मान देते प्रतीत हो रहे हैं । भारतीय संस्कृति में शिव - पार्वती  को समर्पित यह सावन हमें धरती के इस छोर पर उत्तर ध्रुवीय प्रकाश की किरणों का नर्तन, अर्द्धनारीश्वर के साक्षात दर्शन का अपरिमित आनंद दे रहा है !! अदभुत दृश्य !!!!        
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रविवार, 16 जुलाई 2017

" सुमेरु-ज्योति या औरोरा बोरियालिस "

इस समय कैनेडा के वेनकुवर में होने के कारण औरोरा बोरियालिस को देखने के लिए उत्सव की सी गहमागहमी को नज़दीक से देखने का अवसर मिला। "औरोरा बोरियालिस "हमारी धरती के उत्तरी अक्षांश पर नाचती प्रकाश किरणें , सबसे ऊपर चमकदार हरा रंग बीच में पीला और नीचे लाल रंग की लहराती किरणों का मनभावन नर्तन। जिसे भारतीय संदर्भों में हम " उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश " और " सुमेरु ज्योति " के नाम से जानते हैं। (दक्षिणध्रुवीय प्रकाश को" कुमेरु ज्योति " कहते हैं ) हमनें प्राय: चित्रों ,वीडियो आदि में जो रूप देखे थे उनमें एक क्षितिज पर उभरते भोर के रंगों वाला भी था,आज  जब हमें पता चला कि औरोरा के रमणीय दृश्य को देखने के लिए रतजगा भी करना होगा और काफ़ी दूर भी जाना होगा तो हमनें और अनिल जी ने अपने  फ़ोन उठाए  और घर के बाहर की सड़क पर उस छोर तक पहुँच गए जहाँ रात के नौं बजे के बाद के क्षितिज को,कई रंग अपनी सुंदर चमकीली आभा से जगमगा रहे थे। सच तो यह है कि फ़ोन से लिए इन चित्रों में वो दीपावली के दीयों की झिलमिलाती कतारों वाला दृश्य हम चाह कर भी कैद नहीं कर पाए। इन सभी सिंदूरी लाल ,केसरिया ,पीले ,बसंती रंगों की हर रेखा के किनारों पर अनगिनत दीपों की टिमटिमाती रौशनी की छवि उतारने के लिए कैमरा चाहिए था और पल-पल बदलते इस आकाश के अद्वितीय नज़ारे को छोड़कर घर जाकर कैमरा लाने कोई नहीं जाना चाहता था। इस रात नें जो जादुई पल हमें दिए हैं उस  जादू का असर हमारे लिए " सुमेरु-ज्योति या औरोरा बोरियालिस " को देखने से कम नहीं है !!!!